॥ आरती (लक्ष्मी माता) — धन-समृद्धि की देवी ॥
यह आरती लक्ष्मी माता को समर्पित है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं।
जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुम बिन कौन सुख पावे, तुम बिन कौन सुख पावे।।
तुम बिना न कोय सुखी, तुम बिना न कोय धनवान। तुम बिना न कोय सकल, सुख समृद्धि प्रदान। धन धान्य भरपूर करो, कोटि कोटि बार अरदास। लक्ष्मी माता दीन दयाल, करो हमारे घर प्रकाश।।
दैवी गुण स्वरूपा माता, सोने की मूर्ति नारी। कमल पर बैठी लक्ष्मी, सुख शांति की भारी। विष्णु प्रिय भार्या माता, धन ऐश्वर्य प्रदानकारी। जय लक्ष्मी माता सदा, सब भक्त सुख भारी।।
धन धान्य बढ़ावो माता, घर घर में समृद्धि। दिल से दिल मिलाकर, प्रेम शांति की सिद्धि। गरीबों को अन्न दो, भूखों को अन्न भोजन। लक्ष्मी माता कृपा करो, करो सब का कल्याण संचोजन।।
जय जय लक्ष्मी माता, धन ऐश्वर्य दाता। जय विष्णु वल्लभे, कल्याण कारा माता। जय धनदायिनी माता, घर घर बसने वाली। जय लक्ष्मी माता सदा, सकल भक्त सुख पाली।।
(आरती समाप्त)
हमारे व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें
आरती, चालीसा और दैनिक अनुष्ठानों की समय पर अपडेट सीधे अपने फोन पर प्राप्त करें।
अभी जुड़ें