॥ आरती (श्री कृष्ण) — मुरलीधर की आरती ॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, गोपी गीतों के निखार हैं।
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव।। राधा रानी के हमसफ़र, मुरलीधर श्याम सुंदर। झूमे वृंदावन का आलोक, गिरिधर गिरिधारी त्रिलोक।। कनक मुकुट मोर मुकुट, मोरन समेत सूपर। आपकी लीला अनूपा, गिरिधर कृपानिधि धर।। चारु वदन चंद्रमा, वासुदेव की छाया। सात समुद्र का शरण, सदा बरसते अमृतधारा।। हरि नाम के जपो स्वर, विजय महामंत्र। श्री कृष्ण गोविंद की आरती, भक्ति रूप निशांत।।
(आरती समाप्त)
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