॥ आरती (दुर्गा माता) — शक्ति स्वरूपा ॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। त्रिशूल धर, कमल पद, दुर्गा रानी धारी।। रक्त पुष्प धारिणी, भुज चार वर मुद्रा धारी। महिषासुर नाम शून्य, शत्रु संहार की धारी।। चंद्र मुकुट सोहे, चन्द्रिका की रश्मियाँ। गण गण भाग्य विधाता, शैलपुत्री धरणी माता।। सर्व गुण संपन्न देवी, रावण संहारिनी। जय जय जय दुर्गा माता, संकट मोचन दानी।।
(आरती समाप्त)
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