॥ आरती (महादेव) — त्रिलोचन महादेव ॥
महादेव शिव शम्भु, कैलाशधारी रघुवंशी।
ओम जय शिव ओंकारा, महाकाल भय हारा। त्रिशूल धारी, चंद्र कांति, गंगा-तरंगिणी सवारी।। सत्य तनु, भय नाशक, भूतनाथ-पार्वतीपति। कर्पूर गन्धानुलिप्त, दारुक वन के दिव्य विभूति।। स्मरण करे जो भक्त शंकर, दुःख-दरिद्र सब मिटे। जूहीं धूप, शमी, गंध पुष्प अर्पित कर मोरे दिव्य। जय शिव ओंकारा, जय महादेव, भूत-भवानी राखी। कृपा करो महाकाल, भक्तों के कल्याण साक्षी।।
(आरती समाप्त)
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