॥ आरती (अन्नपूर्णा) — उपासना स्तुति ॥
अन्नपूर्णा देवी, भूख-तान को शांति॥
जय अन्नपूर्णा, जय अन्नपूर्णा, धान्यी माता सुखदाई। धान्य दत्ता आरती गावे, भक्तों के घर उज्ज्वल छाई।। अन्नमय भोग, दाल, चावल, गेंहू समर्पित करूँ। सिद्धि भोग भारत लाऊँ, भिक्षुक को अन्न दान चढ़ूँ।। अन्नपूर्णा, अन्नपूर्णा, भूमंडल निदान। भक्तों को रोटी प्रदान कर, संचित पाप विरान।।
(आरती समाप्त)
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