॥ आरती (ईश्वर) — ईश्वर शरण ॥
ईश्वर परमात्मा की आरती, आत्मा में ज्योति जलाए।
ईश्वर स्वरूप सबका, अनंत काया धारण ध्रुव। सकल शांति हेतू ध्यावें, ज्ञान प्रकाश औ ध्रुव।। कर्म करें जो साधक, ईश्वर ध्यान में लग जायें। भूल पाप, शुद्धता पावें, सत्कर्म-तरंगी बन जायें।। जय ईश्वर, जय ईश्वर, सर्वत्र प्रभात प्रकाश। भक्ति जलधारा बहती, सत्संग-श्रद्धा अनमोल रीत।।
(आरती समाप्त)
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