॥ आरती (केशव) — केशव पालक ॥
केशव भगवान की आरती, मधुर शंख चलाएं।
जय केशव, जय केशव, मुरलीधर कान्हा प्यारे। शंखचक्र, कमल, गदा हाथ, घनघोर में झंडे सारे।। कृष्ण लीला, ब्रजधामा, राधे रानी नाचे भाव से। केशव नाम का जप जो करे, जीवन में पावे प्यारें।। जय केशव, जय केशव, सर्वत्र प्रकाश करे। भक्तों की आशा पर टिके, कल्याण सरिता बहे।।
(आरती समाप्त)
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