॥ आरती (संतोषी संध्या) — देवताओं की पुण्य आरती ॥
संतोषी माता संध्या आरती, चने गुड़ से भक्ति।
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता, स्नेह की ज्योति। गुड़ चने, कपूर, धूप के साथ, सब दुख हरें ज्योति।। भक्तों की पूर्ति करो तुम, संतोष सदा बटोर। श्रद्धा भावना जो धारण, तिनको दान दो मोर।। जय संतोषी माता, जय संतोषी माता, भक्त जन सेवा तुम्हारी। कृपा कर प्रिय माता, जीवन में सुख सवारी।।
(आरती समाप्त)
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