॥ आरती (महालक्ष्मी) — वैभव धरा ॥
महालक्ष्मी माता की आरती, धन धान्य हितदायिनी।
जय महालक्ष्मी, जय महालक्ष्मी, कमल पद सरोजिनी। गजमुख, गजांकुर मुकुट, दीप्तिमान धनराशि। धन्य चरण आशीषी जनों, सुख-शांति की वरदानी।। शुभ-लक्ष्मी शोभा घट, दीप जलाए सुहावनी। जय महालक्ष्मी, जय महालक्ष्मी, ओंकारा सदा गाईं। भक्तों के द्वार सजती, मंगलकामना बढ़ाईं।।
(आरती समाप्त)
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