॥ आरती (ओमकारेश्वर) — ओंकार शिव ॥
ओंकारेश्वर शिवरूप, नर्मदा तट का श्रृंगार।
जय ओंकारेश्वर, जय ओंकारेश्वर, त्रिशूल पाश धारी। गंगा शंख, चंद्र, शेषसंग, कैलाश प्रभात पुरी। कर्म, भक्ति, ज्ञान की ज्योति, भक्तों पर सदा बहे। जीवन जाल से मुक्त हो, शिव चरण सब कर गहे।। जय ओंकारेश्वर, जय ओंकारेश्वर, महाकालधाम। कृपा कर सदा भक्तों पर, विनती यही नाम।।
(आरती समाप्त)
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