॥ आरती (हनुमान) — भक्त कुलशिरोमणि ॥
यह आरती हनुमान जी को समर्पित है, जो भक्ति के प्रतीक हैं।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर। रामदूत अतुलित बलधामा, अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी। कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा। हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै, काँधे मूँज जनेऊ साजै।।
संकट कटैं मिटैं सब पीड़ा, जो सुमिरै हनुमत बलवीरा। जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाईं।।
राम लखन सीता मन बासी, लंका ताड़न को दृढ़ राशी। भक्त हृदय सदा निवासी, राम रखवाल हनुमान प्रशंसी। बुद्धि बिवेक बल पौरुष धामा, कंचन बरन काय कमनीय धामा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाई। जय राम राम राम जपु लागै, जीवन मोक्ष सुख सब पावै।।
(आरती समाप्त)
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